भारत में राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली: प्रक्रिया, नियम और महत्वपूर्ण तथ्य
भारत का राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक प्रमुख होता है। राष्ट्रपति का चुनाव एक विशेष निर्वाचन प्रणाली के तहत किया जाता है, जिसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation System) एवं एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote System) कहा जाता है। इस ब्लॉग में हम भारत में राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया को विस्तार से समझेंगे।
1. राष्ट्रपति चुनाव की संवैधानिक प्रक्रिया
संविधान के अनुच्छेद 52 से 62 में भारत के राष्ट्रपति के चुनाव की पूरी प्रक्रिया दी गई है।
विषय | संविधान अनुच्छेद |
---|---|
राष्ट्रपति का पद | अनुच्छेद 52 |
राष्ट्रपति का निर्वाचन | अनुच्छेद 54 |
निर्वाचक मंडल (Electoral College) | अनुच्छेद 55 |
निर्वाचन की पद्धति | अनुच्छेद 55(3) |
राष्ट्रपति के लिए योग्यता | अनुच्छेद 58 |
कार्यकाल | अनुच्छेद 56 |
पुनर्निर्वाचन | अनुच्छेद 57 |
चुनाव संबंधी विवाद | अनुच्छेद 71 |
2. राष्ट्रपति का निर्वाचन मंडल (Electoral College)
भारत में राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से नहीं होता, बल्कि निर्वाचक मंडल (Electoral College) के सदस्य मतदान करते हैं।
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भारत में राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली |
निर्वाचक मंडल के सदस्य:
- लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य
- सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
- केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली और पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
जो लोग राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं करते:
- राज्यसभा और लोकसभा में नामित सदस्य
- विधान परिषदों के सदस्य (MLCs)
- केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभा के मनोनीत सदस्य
3. राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया
(A) चुनाव की अधिसूचना
राष्ट्रपति चुनाव कराने की जिम्मेदारी भारत के निर्वाचन आयोग की होती है। चुनाव आयोग चुनाव की अधिसूचना जारी करता है।
(B) नामांकन प्रक्रिया
- नामांकन पत्र भरना – कोई भी व्यक्ति जो राष्ट्रपति चुनाव लड़ना चाहता है, उसे नामांकन पत्र भरना होता है।
- समर्थन पत्र – किसी उम्मीदवार के नामांकन के लिए कम से कम 50 प्रस्तावकों और 50 अनुमोदकों का समर्थन आवश्यक होता है।
- जमानत राशि – राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को नामांकन के साथ ₹50,000 की जमानत राशि जमा करनी होती है।
(C) मतदान प्रक्रिया
राष्ट्रपति चुनाव में गुप्त मतदान नहीं होता, बल्कि विशेष मतदान प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
- मतदान आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation System) द्वारा होता है।
- मतदाताओं को एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote System) के तहत मत डालना होता है।
- सांसदों और विधायकों के मतों का मूल्य अलग-अलग होता है।
4. मतों का मूल्यांकन (Value of Votes Calculation)
(A) विधायकों के मत का मूल्य
किसी राज्य के प्रत्येक विधायक के मत का मूल्य निम्नलिखित फार्मूले से निकाला जाता है:
उदाहरण:
उत्तर प्रदेश के एक विधायक के मत मूल्य की गणना:
(B) सांसदों के मत का मूल्य
सभी निर्वाचित सांसदों के मत मूल्य की गणना:
2022 के राष्ट्रपति चुनाव में एक सांसद के मत का मूल्य 700 था।
5. एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote System)
इस प्रणाली में प्राथमिकता क्रम (Preferential Voting System) का उपयोग किया जाता है।
मतदान प्रक्रिया:
- मतपत्र पर सभी उम्मीदवारों के नाम होते हैं।
- मतदाता अपनी पसंद के अनुसार 1, 2, 3, ... क्रम में प्राथमिकता अंकित करता है।
- यदि किसी उम्मीदवार को पहले वरीयता वाले कुल वैध मतों का 50%+1 मत प्राप्त होता है, तो उसे विजेता घोषित किया जाता है।
- यदि कोई भी उम्मीदवार पहली वरीयता में बहुमत नहीं प्राप्त करता, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को हटा दिया जाता है, और उसके मत दूसरे वरीयता वाले उम्मीदवार को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।
- यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कोई उम्मीदवार बहुमत प्राप्त नहीं कर लेता।
6. राष्ट्रपति चुनाव में विवाद और न्यायिक समीक्षा
राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े विवादों को संविधान के अनुच्छेद 71 के तहत सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
चुनाव रद्द होने के कारण:
- गलत मतदान या अनियमितता।
- उम्मीदवार की अयोग्यता।
- गलत मतगणना।
अब तक, भारत में किसी भी राष्ट्रपति चुनाव को न्यायालय ने रद्द नहीं किया है।
7.राष्ट्रपति पद के लिए अर्हता (Eligibility for President)
कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति पद के लिए तभी योग्य होता है, जब:
- वह भारतीय नागरिक हो।
- उसकी आयु 35 वर्ष या उससे अधिक हो।
- वह लोकसभा का सदस्य बनने के योग्य हो।
- वह किसी लाभ के पद (Office of Profit) पर कार्यरत न हो।
8. राष्ट्रपति का कार्यकाल और पुनर्निर्वाचन
विषय | विवरण |
---|---|
कार्यकाल | 5 वर्ष |
पुनर्निर्वाचन | असीमित बार संभव |
शपथ ग्रहण | भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा |
अस्थायी राष्ट्रपति | उपराष्ट्रपति |
महाभियोग प्रक्रिया | अनुच्छेद 61 |
9. भारत के राष्ट्रपति को कौन हटा सकता है?
भारत में राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद होता है। भारतीय संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति को एक निश्चित प्रक्रिया के तहत ही हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया "महाभियोग" (Impeachment) कहलाती है। भारत में अब तक किसी भी राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, लेकिन संविधान में इस प्रक्रिया का पूरा विवरण दिया गया है।
राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 61 के तहत राष्ट्रपति को हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। यह प्रक्रिया संसद द्वारा चलाई जाती है और यह एक जटिल एवं लंबी प्रक्रिया होती है। इसे निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:महाभियोग प्रस्ताव पेश करना
राष्ट्रपति को हटाने के लिए किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जा सकता है।
इस प्रस्ताव को सदन के कुल सदस्यों के कम से कम एक-चौथाई (1/4) सदस्यों का समर्थन मिलना आवश्यक होता है।
प्रस्ताव में राष्ट्रपति द्वारा किए गए "संविधान के उल्लंघन" (Violation of the Constitution) का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
जांच प्रक्रिया
प्रस्ताव पारित होने के बाद सदन एक जाँच समिति का गठन करता है जो राष्ट्रपति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच करती है।
राष्ट्रपति को अपना बचाव करने का पूरा अवसर दिया जाता है। वे स्वयं या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से अपना पक्ष रख सकते हैं।
मतदान और दूसरे सदन को भेजना
यदि जाँच के बाद सदन आरोपों को सही मानता है, तो इस प्रस्ताव पर मतदान किया जाता है।
प्रस्ताव पारित करने के लिए सदन के कुल सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होती है।
इसके बाद प्रस्ताव को संसद के दूसरे सदन में भेजा जाता है, जहाँ वही प्रक्रिया दोहराई जाती है।
राष्ट्रपति पद से हटाना
यदि दूसरा सदन भी दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव को पारित कर देता है, तो राष्ट्रपति को पद से हटा दिया जाता है।
इसके बाद भारत का मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) नए राष्ट्रपति के चुनाव होने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर सकता है।
महाभियोग प्रस्ताव पेश करना
राष्ट्रपति को हटाने के लिए किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जा सकता है।
इस प्रस्ताव को सदन के कुल सदस्यों के कम से कम एक-चौथाई (1/4) सदस्यों का समर्थन मिलना आवश्यक होता है।
प्रस्ताव में राष्ट्रपति द्वारा किए गए "संविधान के उल्लंघन" (Violation of the Constitution) का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
जांच प्रक्रिया
प्रस्ताव पारित होने के बाद सदन एक जाँच समिति का गठन करता है जो राष्ट्रपति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच करती है।
राष्ट्रपति को अपना बचाव करने का पूरा अवसर दिया जाता है। वे स्वयं या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से अपना पक्ष रख सकते हैं।
मतदान और दूसरे सदन को भेजना
यदि जाँच के बाद सदन आरोपों को सही मानता है, तो इस प्रस्ताव पर मतदान किया जाता है।
प्रस्ताव पारित करने के लिए सदन के कुल सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होती है।
इसके बाद प्रस्ताव को संसद के दूसरे सदन में भेजा जाता है, जहाँ वही प्रक्रिया दोहराई जाती है।
राष्ट्रपति पद से हटाना
यदि दूसरा सदन भी दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव को पारित कर देता है, तो राष्ट्रपति को पद से हटा दिया जाता है।
इसके बाद भारत का मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) नए राष्ट्रपति के चुनाव होने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर सकता है।
महाभियोग की कठिनाईयां
महाभियोग की प्रक्रिया बहुत जटिल और कठिन होती है क्योंकि इसमें संसद के दोनों सदनों से दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। चूंकि भारत में राष्ट्रपति का पद संवैधानिक होता है और वह कार्यपालिका के सीधे नियंत्रण में नहीं होते, इसलिए महाभियोग की संभावना बहुत कम होती है। अब तक किसी भी भारतीय राष्ट्रपति को महाभियोग के द्वारा नहीं हटाया गया है।भारत के राष्ट्रपति को केवल संसद के माध्यम से ही हटाया जा सकता है, और इसके लिए महाभियोग की लंबी और कठिन प्रक्रिया अपनाई जाती है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि केवल गंभीर संवैधानिक उल्लंघन के मामलों में ही राष्ट्रपति को हटाया जाए। इस कारण, भारतीय लोकतंत्र में राष्ट्रपति का पद बहुत सम्मानजनक और सुरक्षित होता है।
भारत के राष्ट्रपति को केवल संसद के माध्यम से ही हटाया जा सकता है, और इसके लिए महाभियोग की लंबी और कठिन प्रक्रिया अपनाई जाती है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि केवल गंभीर संवैधानिक उल्लंघन के मामलों में ही राष्ट्रपति को हटाया जाए। इस कारण, भारतीय लोकतंत्र में राष्ट्रपति का पद बहुत सम्मानजनक और सुरक्षित होता है।
10. निष्कर्ष
भारत में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया जटिल लेकिन लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित है। आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि राष्ट्रपति पूरे देश का प्रतिनिधित्व करे। इस प्रक्रिया में संसद और राज्य विधानसभाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, जिससे यह एक संतुलित प्रणाली बनती है।
भारत का राष्ट्रपति संविधान का रक्षक और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ होता है। इसलिए, यह आवश्यक है कि राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।
भारत में राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली: प्रक्रिया, नियम और महत्वपूर्ण तथ्य – 20 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
-
भारत में राष्ट्रपति का चुनाव कौन कराता है?
➜ राष्ट्रपति का चुनाव भारत का चुनाव आयोग कराता है। -
राष्ट्रपति चुनाव के लिए कौन-कौन मतदान करते हैं?
➜ लोकसभा, राज्यसभा और सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं। -
राष्ट्रपति का चुनाव संविधान के किस अनुच्छेद के तहत होता है?
➜ अनुच्छेद 54 के तहत राष्ट्रपति का चुनाव कराया जाता है। -
राष्ट्रपति चुनाव में नामांकन के लिए न्यूनतम कितने प्रस्तावकों और समर्थकों की आवश्यकता होती है?
➜ कम से कम 50 प्रस्तावक और 50 समर्थक आवश्यक होते हैं। -
राष्ट्रपति चुनाव में मतदान का तरीका क्या होता है?
➜ प्रत्येक मतदाता का वोट वेटेड (अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली) होता है और मतदान एकल संक्रमणीय वरीयता मत प्रणाली (Single Transferable Vote System) से होता है। -
राष्ट्रपति चुनाव में कौन मतदान नहीं कर सकता?
➜ राज्यसभा और लोकसभा के मनोनीत सदस्य एवं विधान परिषदों के सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं कर सकते। -
भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल कितने वर्षों का होता है?
➜ राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। -
राष्ट्रपति पद के लिए कौन पात्र होता है?
➜ वह व्यक्ति जो भारत का नागरिक हो, 35 वर्ष या उससे अधिक आयु का हो, और लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो। -
राष्ट्रपति का चुनाव कब कराया जाता है?
➜ चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल समाप्त होने से पहले 60 दिनों के भीतर कराना आवश्यक होता है। -
राष्ट्रपति चुनाव में वोटों की गणना कैसे की जाती है?
➜ राज्यों के विधायकों एवं सांसदों के मतों का अलग-अलग वेटेज (मत मूल्य) होता है, और कुल वैध वोटों का 50% से अधिक प्राप्त करने वाला उम्मीदवार विजयी घोषित होता है। -
राष्ट्रपति चुनाव में टाई होने की स्थिति में क्या होता है?
➜ यदि टाई हो जाता है, तो निर्णायक मत (Casting Vote) लोकसभा अध्यक्ष नहीं बल्कि चुनाव आयोग के निर्णय अनुसार तय किया जाता है। -
यदि राष्ट्रपति चुनाव में कोई एक ही उम्मीदवार हो तो क्या चुनाव कराया जाएगा?
➜ नहीं, यदि एक ही उम्मीदवार है और वह सही रूप से नामांकित है, तो उसे निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया जाता है। -
भारत में अब तक कितने राष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए हैं?
➜ अब तक दो राष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए हैं – नीलम संजीव रेड्डी (1977) और डॉ. राजेंद्र प्रसाद (1952)। -
राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया क्या है?
➜ महाभियोग प्रक्रिया (Impeachment Process) के माध्यम से राष्ट्रपति को हटाया जा सकता है। -
महाभियोग प्रक्रिया किस अनुच्छेद के तहत की जाती है?
➜ राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 61 में दी गई है। -
भारत में राष्ट्रपति चुनाव किस प्रकार का होता है – प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष?
➜ राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष मतदान प्रणाली द्वारा होता है। -
भारत में राष्ट्रपति चुनाव के लिए न्यूनतम कितनी आयु होनी चाहिए?
➜ राष्ट्रपति उम्मीदवार की आयु 35 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। -
राष्ट्रपति चुनाव में मतगणना की पद्धति क्या होती है?
➜ एकल संक्रमणीय वरीयता प्रणाली (Single Transferable Vote) के अनुसार मतों की गणना की जाती है। -
यदि राष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त हो जाए और नया राष्ट्रपति निर्वाचित न हो तो क्या होगा?
➜ जब तक नया राष्ट्रपति शपथ नहीं लेता, तब तक उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है। -
भारत के राष्ट्रपति की शपथ कौन दिलाता है?
➜ राष्ट्रपति की शपथ भारत का प्रधान न्यायाधीश (Chief Justice of India) दिलाता है।
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